
रिपोर्टर = भव्य जैन
झाबुआ। शारदीय नवरात्रि पर्व का शुभारंभ धार्मिक उल्लास के साथ झाबुआ नगर में हो गया है। नगर में स्थित प्रदेश का एकमात्र दक्षिण मुखी स्वयंभू मां कालिका मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है।
प्रतिमा इमली के पेड़ के नीचे स्थित है और इसकी विशेषता यह है कि मां का स्वरूप दिन में तीन बार बदलता है—सुबह बाल स्वरूप, दिन में युवा स्वरूप और शाम को वृद्ध स्वरूप। प्राचीन काल से यहां आस्था का केंद्र यह मंदिर राजशाही के समय से पूजनीय रहा है। उस समय राजा स्वयं नंगे पांव आकर पूजा-अर्चना करते थे।
नवरात्रि पर्व में प्रतिदिन प्रातः 4 बजे काकड़ आरती होती है, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु शामिल होते हैं। रात्रि 8 बजे पुनः माता की आरती के बाद गरबा रास का आयोजन होता है।
नगर में स्थित बहादुर सागर तालाब किनारे अंबे माता मंदिर भी दर्शन व आस्था का प्रमुख स्थल है, जहां रात्रि को बड़ी संख्या में बालक-बालिकाएं गरबा खेलने पहुंचते हैं।
सबसे ज्यादा चहल-पहल नगर के राजवाड़ा स्थित राजवाड़ा मित्र मंडल द्वारा आयोजित गरबा में रहती है। यह नगर का सबसे प्रमुख गरबा पांडाल है, जहां प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु गरबा खेलने पहुंचते हैं।
नगर के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी श्रद्धालु माता की प्रतिमा स्थापित कर भजन, पूजन, आरती एवं गरबा का आयोजन कर रहे हैं।









